Happy Mother's Day
माँ ...😢😢😢😢
पूजा प्रजापति अपने कुछ सहेलियों के साथ गाँव के मेले में घूमने जाती है...खासकर गाँव वालों को तो पता ही होता है की मेले मे हर तरह की दुकानें लगती है...। पूजा और उसकी सहेलियां भी एक चुड़ीयो की दुकान मे जाकर रंग बिरंगी चुड़ीया बिन्दी...खरीदती है ... लौटते वक्त सबकी नजर एक फकीर पर पड़ती है । पूजा की सहेलियां कहती है की...चल फकीर को पैसे देकर अपनी अपनी किस्मत के बारे मे पूछते हैं । पता तो चले की...हमें कैसा पति मिलने वाला है। सभी एक साथ खिलखीलाती हैं । मगर पूजा कहती है की कोई कीसी की किस्मत नहीं बता सकता । जो लिखकर आया है वही होगा। हां फकीर बाबा को कुछ दान देना है तो चलो मगर बकवास की बातों के लिए नहीं। सभी फकीर के पास आती है। लडकीयां फकीर की झोली मे दान देती हैं। मगर जब लड़कीयो की टोली साथ हो और अपनी जिद पूरी न करे..ये तो हो नहीं सकता। सहेलियां फकीर से कहती हैं की... बाबा हमारी हथेलीयो की हस्तरेखा पढ़कर बता दिजीए न की हमें कैसा पति मिलने वाला है।
फकीर- जो खुदा लिखता है वह कोई इंसान कभी पढ़ नहीं सकता बेटी...
एक लड़की - फिर भी बाबा ऐसे ही बता दो न आर्शीवाद की तरह...
फकीर फिर सबकी हथेलीयो को देखकर कुछ न कुछ कहता है। फिर सब जैसे ही वापस जाने को मुड़ते हैं की ...फकीर पुजा को बोलता है...बेटी...तूने नहीं दिखाया तो अपना हाँथ? पूजा न चाहते हुए भी अपनी हथेली फकीर को दिखाती है। हथेली देखकर फकीर कहता है की.. तेरी उम्र बहुत लम्बी है बेटी मगर येदी तू माँ बनी तो...तेरी उम्र वहीं समाप्त हो जाऐगी।
पूजा- बाबा मैं इन चिजो पर विश्वास तो नहीं करती मगर एक सवाल आपसे...
क्या माँ की भी उम्र होती है?
फकीर- नहीं बेटी...न माँ की कोई उम्र होती है और न ही माँ कभी मरती है,
माँ तो बस माँ होती है जिसे हम धरती का ईश्वर भी कहते हैं।
मगर मैंने जो तुम्हे कहा वह मेरे मन से नहीं वल्कि तेरी तकदीर के कुछ तशबीरे तेरी हथेली के लकीरों पर अंकित है।
इस धरती पर ईश्वर सबसे ज्यादा इम्तिहान एक माँ की लेता है
और माँ भी हर इम्तिहान पे खरी उतरती है
कुछ ऐसा ही इम्तिहान तेरी जिंदगी के लिए भी खुदा ने तय कर रखा है ।
मगर पूजा आगे कुछ न कहते हुए अपनी सहेलियों के साथ वापस घर के लिए निकलती हैं रास्ते मे सहेलियां कहती है की अरे पूजा तू टेन्सन न ले...फकीर बकवास कर रहा था। कमबख्त सबके हाथ तो छू लिया मगर एक तेरा हाँथ छुना रह गया था।
पुजा कहती है की सच तो मैंने भी माना नहीं है मगर कोई बेटी बोलकर ऐसी गंदी सोच कभी नहीं रखता। इसलिए फकीर बना है वर्ना आसाराम बापू या राम रहीम बन जाता।
सहेलियों को कह दिया पुजा ने की फकीर की बातों पर विश्वास नहीं है
मगर पुजा ने फकीर बाबा की बातों को अपने दिल मे बाँध के रख चुकी थी की वह इस बात को कभी न भूले ।
इस तरह एक दिन पुजा की शादी हो जाती है एक अच्छे लड़के से और ससुराल भी बहुत अच्छा मिला था। सभी उसे बेहद प्यार करते थे। और वह भी कोई कसर नहीं छोड़ती थी सेवा करने की सभी लोगों की...
वक्त के साथ एक दिन पुजा के गर्भवती होने का समाचार घरवाले सभी को मिलता है। घर का काम तो छोडीये...येदी गलती से खांसती भी है तो पूरा परिवार जमा हो जाता है देखभाल के लिए। सभी कहते है की लड़का हो या लड़की हमें कोई फर्क नहीं पड़ता । हमें बस इस घर मे नन्हे कदमों की अवाज, बच्चों की कीलकारीयां सुननी है इस घर में । सभी खुश हर दिन दीपावली होती है । और वह दिन भी आता है जब बच्चा को जनने का दिन।
डाक्टर को जाँच मे पता चलता है की बच्चा गर्भ मे उल्टा होकर फसके बैठा है.. डाक्टर पुजा को बिना बताये उसके पति और घरवालो को सब कहानी बताता है।
और अंत मे कहता है की...हम माँ और बच्चे मे से कीसी एक को बचा सकते हैं। सब परेशान हैरान क्या करे न करे । पुजा के सास ससुर कहते हैं की बहू चाहिए हमें मगर अंतिम फैसला उसके पति का होगा। मगर डाक्टर से कहते है की पहले दोनों को बचाने की कोशिश कीजिए । डाक्टर हाँथ उठाकर कहता है ये मुमकीन नहीं है।
फिर सबका फैसला पुजा के हक में जाता है। यानी की पुजा को बचाया जाऐ...इधर पुजा को फकीर की बात याद आती है और बाहर पति, सास ससुर और डाक्टर को परेशान देखकर वह पूरी कहानी समझ जाती है। सब बाहर होते हैं और डाक्टर नर्स सारे अपरेशन टेबल के पास पुजा के साथ होते है। पूजा डाक्टर से कहती है...डाक्टर साहब...अपरेशन से पहले मैं अकेले मे आपसे कुछ बातें करना चाहती हूँ । फिर डाक्टर के इशारे पर सभी नर्स दूसरे कमरे मे चले जाती हैं । बाहर बैठे सास ससुर और पति को बस इतना पता है की.. पुजा को बचाया जा रहा है। मगर डाक्टर और पुजा के अलावा कोई नहीं जानता की अंदर बातें क्या हो रही है।
पुजा - आप मुझसे जो भी छूपा लो डाक्टर मगर मुझे पता है की मैं और मेरे बच्चे मे सिर्फ एक ही बच सकता है। डाक्टर हैरान और आवाक...फिर पुजा कहती है की मेरे घरवालो से आपको इजाजत मिली है की मुझे बचाया जाऐ..क्योंकि वे लोग मुझसे बेहद प्यार करते है और मुझे कभी खोना नहीं चाहते...
पता है डाक्टर साहब आपको..?
मुझे एक फकीर ने आज से दो साल पहले ही कह दिया था की...येदी तेरा बच्चा हुआ तो तू मर जायेगी..अगर बच्चा नहीं हुआ तो तेरी उम्र बहुत लम्बी होगी... ये सब जानती हुये भी मैं खुद को रोक नहीं सकी मां बनने को।
पता है क्यों, ? क्योंकि माँ बनना सौभाग्य की बात है । आप तो मर्द हो आपको इसका एहसास कैसे होगा। येदी आज आपने मेरे बच्चे को मारकर एक मां को बचाया तो धरती के हर मां पे एक कलंक लग जायेगा । शायद फिर कोई उसे ईश्वर की परछाई नहीं स्वार्थी औरत कहेगा। हाँ मुझे मेरा पति चाहिए सास ससुर भी चाहिए
मेरे सभी अपने मुझे चाहिए । मगर मैं एक मां हूँ इसलिए मुझे पहले मेरा बच्चा चाहिए। आप डाक्टर को दूसरा भगवान कहते हैं । मेरी जिंदगी और मौत का फैसला मैं करती हूँ । मुझे बच्चा चाहिए मगर जिंदा चाहिए।
डाक्टर - मगर मैं उनको क्या कहूँगा?
संध्या - कह दीजिएगा की एक मां से पाला पड़ा था मेरा 😢😢
इसलिए हार गया एक माँ से,
डाक्टर- बेटी एक आखरी सवाल, जब तुम्हे फकीर की बात याद थी तो फिर तुम माँ बनने से बच भी सकती थी न बेटी?😢
पुजा मुस्कुरा के कहती है, मुझे उस आसमान मे बैठे खुदा को भी तो शर्मिन्दा करना था न जिसने माँ की इम्तिहान लेने की गलती कर दी 😢
एक माँ कभी जीतना नहीं चाहती मगर जब बच्चे की बात आती है तो फिर माँ कभी हारती नहीं है,
तुरंत डाक्टर ...पुजा के पैरों मे गीरकर रोते हुए कहते हैं।
क्यों कहते है लोग की मां धरती का भगवान है... आज सचमुच खुद अपने सामने देख लिया। मां तुम महान हो।
पुजा गुजर जाती है बच्चे को जन्म देकर...डाक्टर पूरी कहानी सुना देता है पुजा के पति सास ससुर और सभी अपनों को...
और कहता है मैं एक मां से हार गया 😢😢😢
सभी की पलके गीली थी और सभी ने एक साथ ही कहा ...
सचमुच माँ को समझना बेहद मुश्किल है इस जहाँ मे ।
समाप्त

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